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Sunday, November 13, 2011

इन्टरनेट क्या है

इन्टरनेट शब्द को अगर दो भागो मे बाँट दिया जाये तो इंटरनेशनल + नेटवर्क दो शब्द बनते हैं, और दोनों शब्दों का मतलब निकाला जाये तो इसका अर्थ आता हैं अन्तर्राष्ट्रीय जाल अर्थात ऐसा जाल जिसमे सम्पूर्ण संसार शामिल हो।इंटरनेट दुनिया भर में सार्वजनिक रूप से सुलभ कंप्यूटर के सुपर नेटवर्क है. इंटरनेट नेटवर्क मे हजारों की संख्या मे पूरी दुनिया के कंप्यूटर जुड़े हुए हैं

इंटरनेट का सफर, 1970 के दशक में, विंट सर्फ (Vint Cerf) और बाब काहन् (Bob Kanh) ने शुरू किया गया। उन्होनें एक ऐसे तरीके का आविष्कार किया, जिसके द्वारा कंप्यूटर पर किसी सूचना को छोटे-छोटे पैकेट में तोड़ा जा सकता था और दूसरे कम्प्यूटर में इस प्रकार से भेजा जा सकता था कि वे पैकेट दूसरे कम्प्यूटर पर पहुंच कर पुनः उस सूचना कि प्रतिलिपी बना सकें – अथार्त कंप्यूटरों के बीच संवाद करने का तरीका निकाला। इस तरीके को ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल {Transmission Control Protocol (TCP)} कहा गया।


सूचना सूचना का इस तरह से आदान प्रदान करना तब भी दुहराया जा सकता है जब किसी भी नेटवर्क में दो से अधिक कंप्यूटर हों। क्योंकि किसी भी नेटवर्क में हर कम्प्यूटर का खास पता होता है। इस पते को इण्टरनेट प्रोटोकॉल पता {Internet Protocol (I.P.) address} कहा जाता है। इण्टरनेट प्रोटोकॉल (I.P.) पता वास्तव में कुछ नम्बर होते हैं जो एक दूसरे से एक बिंदु के द्वारा अलग-अलग किए गए हैं।


सूचना को जब छोटे-छोटे पैकेटों में तोड़ कर दूसरे कम्प्यूटर में भेजा जाता है तो यह पैकेट एक तरह से एक चिट्ठी होती है जिसमें भेजने वाले कम्प्यूटर का पता और पाने वाले कम्प्यूटर का पता लिखा होता है। जब वह पैकेट किसी भी नेटवर्क कम्प्यूटर के पास पहुंचता है तो कम्प्यूटर देखता है कि वह पैकेट उसके लिए भेजा गया है या नहीं। यदि वह पैकेट उसके लिए नहीं भेजा गया है तो वह उसे आगे उस दिशा में बढ़ा देता है जिस दिशा में वह कंप्यूटर है जिसके लिये वह पैकेट भेजा गया है। इस तरह से पैकेट को एक जगह से दूसरी जगह भेजने को इण्टरनेट प्रोटोकॉल {Internet Protocol (I.P.)} कहा जाता

अक्सर कार्यालयों के सारे कम्प्यूटर आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं और वे एक दूसरे से संवाद कर सकते हैं। इसको Local Area Network (LAN) लैन कहते हैं। लैन में जुड़ा कोई कंप्यूटर या कोई अकेला कंप्यूटर, दूसरे कंप्यूटरों के साथ टेलीफोन लाइन या सेटेलाइट से जुड़ा रहता है। अर्थात, दुनिया भर के कम्प्यूटर एक दूसरे से जुड़े हैं। इण्टरनेट, दुनिया भर के कम्प्यूटर का ऎसा नेटवर्क है जो एक दूसरे से संवाद कर सकता है।

इन्टरनेट कैसे काम करता हैं?

मोबाईल से कंप्यूटर पर इंटरनेट चलाना

जब मोबाईल पर इन्टरनेट प्रारम्भ हो जाती हैं तो हम उस मोबाईल का उपयोग मोडेम की तरह करके उसे कंप्यूटर से भी जोड़ सकते हैं और कंप्यूटर पर भी इन्टरनेट का उपयोग कर सकते हैं. सबसे पहले हमें मोबाईल और कंप्यूटर में सम्बन्ध स्थापित करना होगा।
अगर तार के माद्यम से कर रहे है तो-

1. अगर कंप्यूटर में ओपरेटिंग सिस्टम विन्डोज़ एक्स० पी० हैं तो मोबाईल के साथ मिलने वाले सी० डी० को एक बार अपने कंप्यूटर में ऑटो रन करवाना होगा. चूकी जब हम कंप्यूटर में कोई नया हार्डवेयर को जोड़ते हैं तो कंप्यूटर को सॉफ्टवेयर की मदद से ये बतलाना होता हैं कि आखिर उस नए हार्डवेयर का काम क्या हैं और ये कैसे काम करेगा. इस सॉफ्टवेर को ड्राईवर सॉफ्टवेर कहा जाता हैं. और अगर कंप्यूटर में ओपरेटिंग सिस्टम विन्डोज़ सेवेन हैं तो इसकी जरुरत नहीं होती क्यूँकि विन्डोज़ सेवेन में अधिकांश ड्राईवर सॉफ्टवेर पहले से डाला हुआ रहता हैं.

2. जब कंप्यूटर में एक बार सि०डी० चल जाता हैं तो कंप्यूटर को रिस्टार्ट कर देंगे और मोबाईल के साथ मिले तार का एक छोर कंप्यूटर में और दूसरा छोर मोबाईल में जोड़ कर हार्डवेयर अच्छे से जुड़ने का सन्देश आने का इंतजार करेंगे. अगर सब कुछ सही रहा तो नोटीफिकेशन बार (डेस्कटॉप कि एसी जगह जहाँ समय दिखता हैं) पर एक सन्देश आयेगा कि हार्डवेयर सही तरीके से जुड गया हैं और अब आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

Notes:- इस दो स्टेप के करने से ही आपका मोबाईल कंप्यूटर से जुड़ जाता हैं. ऊपर का ये दोनों स्टेप सभी मोबाईल के लिए एक ही होता हैं परन्तु इससे आगे का काम अलग अलग मोबाईल में अलग अलग तरीके से होता हैं. सभी मोबाइल्स सॉफ्टवेयर में जो खास बातें ध्यान रखनी हैं वो हैं- हम मोबाईल जोड़ने के बाद उस मोबाईल सॉफ्टवेयर को खोल लेंगे उसके सेटिंग में जा कर हम जिस कम्पनी का सीम इस्तेमाल कर रहे हैं उसका APN और डायलअप नंबर डालेंगे. APN और डायलअप नंबर हमे उस सीम कम्पनी के ग्राहक सेवा केन्द्र से बात करने पर मिल जाएगा. इस प्रक्रिया के बाद इसी सॉफ्टवेयर से दुवारा इंटरनेट कनेक्ट किया जा सकता हैं

अगर ब्लूटूथ से कर रहे है तो-

1. पहले यह सुनिश्चित करना होता हैं कि कंप्यूटर और मोबाईल दोनों में ब्लूटूथ हैं या नहीं. ब्लूटूथ से जोड़ने के लिए दोनों में ब्लूटूथ होना अतिआवश्यक होता हैं. अगर कंप्यूटर में ब्लूटूथ में नहीं हैं तो बाजार से अलग से ब्लूटूथ खरीदना होता हैं. और अगर मोबाईल में नहीं हैं तो फिर ब्लूटूथ युक्त मोबाईल लेना होता हैं. अलग से लिए गए ब्लूटूथ को कंप्यूटर में लगा कर एक बार उसका ड्राईवर सॉफ्टवेर कंप्यूटर में चलाना होगा. जब ये प्रक्रिया पूरी होती हैं तो नोटीफिकेशन बार पर एक आइकन बन जाएगा.

2. मोबाईल में ब्लूटूथ को ओन् कर लेंगे. उसके बाद नोटीफिकेशन बार वाले ब्लूटूथ आइकन को ओपन करके न्यू डिवाइस सर्च करेंगे. जब ब्लूटूथ सॉफ्टवेर में मोबाईल का आइकन बन जायगा तब पैरिंग का काम करेंगे. इस प्रक्रिया में कंप्यूटर पर कोई अंक दबाना होता हैं फिर उसी अंक को मोबाईल पर दबाना होता हैं. इससे यह सुनिश्चित किया जाता हैं कि डाटा अदान प्रदान करने के लिए दोनों डिवाइस तेयार हैं या नहीं या कोई अन्य उपकरण तो दोनों के बीच में नहीं आ रहा. जब यह सम्पन होती हैं तो हम मोबाईल को सीरियल पोर्ट के तौर पर कांनेक्ट कर देंगे.

इस दो स्टेप के करने से ही आपका मोबाईल कंप्यूटर से जुड़ जाता हैं. फिर ब्लूटूथ आप्शन में डायलअप का इस्तेमाल करके इन्टरनेट प्रारम्भ किया जाता हैं.( By Mr.Shahid Mirza)

From :- JOVIAL INSTITUTE
Address:- 691, Janta Flat, G.T.B. Enclave
E-mail:- Jovial_institute@yahoo.com
Moble No:- 9811387541 # 9211112103

मोबाईल पर इन्टरनेट प्रारम्भ करना

सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लेना होता हैं कि जिस मोबाईल में इन्टरनेट चलाना हैं उसमें GPRS की सुविधा हैं या नहीं. जब यह पता चल जाता हैं कि हाँ मोबाईल में यह सुविधा हैं तो जिस कम्पनी का सीम कार्ड लगा हैं उस कम्पनी के ग्राहक सेवा केन्द्र को फोन कर के GPRS प्रारम्भ करने का आग्रह करना पड़ता हैं. शुरुवाती जाँच के बाद जब ग्राहक सेवा केन्द्र आपके आग्रह को मान लेता हैं तो आपके मोबाईल पर एक सन्देश प्राप्त होगा. यह एक सिस्टम सन्देश होता हैं जिसमे इन्टरनेट सेटिंग्स समाहित होती हैं. इस सन्देश को खोल कर इसे मोबाईल में सेव करना होता हैं. इसके सेव होने के बाद ही मोबाईल में इन्टरनेट प्रारम्भ की जा सकती हैं. हरएक मोबाईल कम्पनी की अपनी अपनी GPRS की शर्ते होती हैं जिसे ग्राहक सेवा केन्द्र के मार्फ़त से जान सकते हैं।


1. GPRS सपोर्ट करने वाला मोबाईल खरीदना.


2. GPRS सेवा देने वाला सीम कार्ड लेना।


3. सीम एक्टीवेट होने के बाद ग्राहक सेवा केन्द्र को GPRS सुविधा के लिए आग्रह करना.
4. ग्राहक सेवा केन्द्र से आया सन्देश (GPRS सेटिंग्स) को मोबाईल में सेव करना.
5. मोबाईल रिस्टार्ट करके मोबाइल इन्टरनेट ब्रोज़र खोल कर इन्टरनेट उपयोग कर सकते हैं।

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